रिपोर्ट कृष्णजीत यादव
शहजादपुर की रामलीला में भावविभोर हुए श्रद्धालु, श्रृंगवेरपुर में गंगा पार कर वनवास को आगे बढ़े प्रभु श्रीराम
टेढ़ीमोड़ कौशांबी। शहजादपुर में चल रहे 253वें प्राचीन श्रीरामलीला महोत्सव में शनिवार को भगवान श्रीराम,माता सीता और लक्ष्मण के गंगा पार करने की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। अयोध्या से वनवास के लिए निकले प्रभु श्रीराम जब श्रृंगवेरपुर पहुंचे तो गंगा पार जाने के लिए केवट से नाव मांगी। केवट ने प्रभु को नाव पर चढ़ाने से पहले उनके चरण पखारने की इच्छा जताई। इस प्रसंग का मंचन देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।लीला के दौरान दिखाया गया कि केवट प्रभु श्रीराम के चरणों को धोने के बाद उन्हें नाव पर बैठाता है और माता सीता व लक्ष्मण के साथ गंगा पार कराता है। गंगा पार उतरने के बाद प्रभु श्रीराम ने केवट को उतराई देने के लिए अपनी अंगूठी दी लेकिन केवट ने अंगूठी नहीं केवट के लिए प्रभु की सेवा और उनके दर्शन ही सबसे बड़ा सौभाग्य था। यह प्रसंग भगवान के प्रति निष्कपट प्रेम,समर्पण और भक्ति की अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है।रामकथा का यह प्रसंग श्रद्धालुओं को संदेश देता है कि सच्ची भक्ति में धन-दौलत और पद-प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं होता। निषादराज केवट का प्रभु श्रीराम के प्रति प्रेम और सेवा भाव भक्त और भगवान के आत्मीय संबंध को दर्शाता है। वनवास के कठिन मार्ग पर आगे बढ़ते प्रभु श्रीराम,माता सीता और लक्ष्मण की लीला ने दर्शकों को मर्यादा,त्याग और कर्तव्य पालन की प्रेरणा दी।प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी शहजादपुर की ओर से आयोजित महोत्सव में विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। रामलीला देखने के लिए क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु जुट रहे हैं कलाकारों ने अपने अभिनय से गंगा पार करने के प्रसंग को जीवंत बना दिया।