राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने काशी नरेश राजकीय विश्वविद्यालय का किया निरीक्षण, मौलश्री का पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भदोही ब्यूरो रिपोर्ट सूर्य प्रकाश पाण्डेय 

 

कुलपति एवं 21 विभागाध्यक्षों के साथ की समीक्षा बैठक, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश

 

विश्वविद्यालय के समग्र विकास के लिए लैब, स्मार्ट क्लास, छात्रावास, लाइब्रेरी एवं आधुनिक आधारभूत सुविधाओं की कार्ययोजना तैयार करने पर दिया जोर

 

विद्यार्थियों से किया संवाद, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, एआई के सदुपयोग एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने का किया आह्वान

 

एनएएसी मानकों के अनुरूप विश्वविद्यालय को विकसित करने, समर्थ पोर्टल के सभी मॉड्यूल सक्रिय करने तथा स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं खेल सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के दिए निर्देश

 

संत रविदासनगर, भदोही 02 नवंबर 2026ः-उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने काशी नरेश राजकीय विश्वविद्यालय, ज्ञानपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत मौलश्री का पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके उपरांत कुलपति प्रो. उमा श्रीवास्तव एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्षों तथा 21 विभागाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक कर शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं आधारभूत व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संकायों का निरीक्षण करते हुए शिक्षण व्यवस्था, प्रयोगशालाओं, उपलब्ध संसाधनों तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की।

समीक्षा बैठक में माननीय राज्यपाल महोदया ने कहा कि विश्वविद्यालय का संचालन निर्धारित नियमों, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं स्पष्ट कार्ययोजना के अनुरूप होना चाहिए। सभी समितियां अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें तथा प्रवेश, परीक्षा, अवकाश प्रबंधन सहित प्रत्येक प्रशासनिक कार्य नियमानुसार एवं समयबद्ध तरीके से संपन्न कराया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने पर विशेष बल देते हुए शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थागत विकास, स्वच्छता एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

डिजिटल प्रशासन एवं तकनीकी सुदृढ़ीकरण के संबंध में उन्होंने समर्थ पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि समर्थ पोर्टल में कुल 42 मॉड्यूल उपलब्ध हैं, जबकि विश्वविद्यालय वर्तमान में तीन मॉड्यूल पर कार्य कर रहा है। उन्होंने शेष मॉड्यूल को भी चरणबद्ध तरीके से सक्रिय करने के निर्देश दिए, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियां अधिक पारदर्शी, सुगम और तकनीक आधारित बन सकें।

विश्वविद्यालय के आधारभूत ढांचे के विकास पर चर्चा करते हुए माननीय राज्यपाल महोदया ने निर्देश दिया कि किसी भी नए भवन अथवा सुविधा का निर्माण कराने से पहले समग्र एवं दूरदर्शी कार्ययोजना तैयार की जाए। भवनों के निर्माण में प्रयोगशालाओं, फार्मेसी, कक्षों के आकार, शिक्षकों के कक्ष, छात्राओं के लिए लेडीज रूम तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का समुचित ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य केवल भवन बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी उपयोगिता, आवश्यकता एवं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में सीवर लाइन, विद्युत व्यवस्था, आंतरिक सड़कें, खेल मैदान, पार्किंग, पेयजल, शौचालय एवं सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं को आधुनिक एवं सुव्यवस्थित तरीके से विकसित करने पर बल दिया। साथ ही आवश्यकतानुसार आगणन एवं एस्टीमेट तैयार कराते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट बोर्ड एवं स्मार्ट क्लास की स्थापना, आधुनिक प्रयोगशालाओं, छात्रावासों में स्वच्छ शौचालय, स्नानघर, किचन, लाइब्रेरी एवं आवश्यक फर्नीचर की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान माननीय राज्यपाल महोदया ने विज्ञान संकाय, शिक्षा संकाय, कला संकाय सहित विभिन्न विभागों व प्रदर्शनी का अवलोकन किया। रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, भूगोल एवं अन्य विभागों की शिक्षण व्यवस्था तथा प्रयोगशालाओं की जानकारी प्राप्त की। शिक्षकों से संवाद करते हुए उन्होंने पाठ्यक्रम संचालन, शोध, अनुसंधान, नवाचार एवं व्यावहारिक ज्ञान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र एवं भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करनी चाहिए।

इसके उपरांत विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा ने किया। प्रारंभ में कुलपति प्रो. उमा श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, भावी योजनाओं एवं विकास की रूपरेखा से राज्यपाल महोदया को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में लगभग सात हजार छात्र-छात्राएं विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं। विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित एवं रोजगारपरक बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत सर्टिफिकेट, डिप्लोमा एवं कौशल विकास पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित एवं सशक्त बनाने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में काशी नरेश राजकीय विश्वविद्यालय भदोही की एक विशिष्ट शैक्षणिक पहचान बनेगा।

विद्यार्थियों से संवाद करते हुए माननीय राज्यपाल महोदया ने उनके प्रश्नों के उत्तर दिए तथा शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, रोजगार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विश्वविद्यालय में समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, शैक्षणिक भ्रमण एवं व्यावहारिक गतिविधियां आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने एनएएसी मूल्यांकन की प्रक्रिया को गंभीरता से समझने तथा उसके अनुरूप विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को विकसित करने पर बल दिया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विषय पर चर्चा करते हुए राज्यपाल महोदया ने इसके सकारात्मक उपयोग एवं संभावित चुनौतियों के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब आधुनिक तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सही दिशा और सकारात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। विद्यार्थियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनने के साथ-साथ एआई का जिम्मेदारीपूर्ण एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के साथ संस्कार, नैतिक मूल्य, अनुशासन एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया।

विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण के संबंध में उन्होंने विश्वविद्यालय में नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रत्येक सोमवार को एक निर्धारित चिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराने पर जोर दिया। साथ ही परिसर में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से स्वच्छता संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए विद्यार्थी समिति गठित करने का सुझाव दिया।

राज्यपाल महोदया ने विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों, स्टार्टअप, कौशल विकास एवं रोजगारपरक नए पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार सृजन एवं शत-प्रतिशत साक्षरता को विकास की महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं बताते हुए कहा कि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने ‘हर हाथ को काम और हर हाथ को काज’ का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को कौशल एवं रोजगार के अवसरों से जोड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कुलाधिपति की विशेष कार्याधिकारी श्री सुधीर महादेव बोबडे, प्रो. रीना सिंह, प्रो. कल्पना अवस्थी, मंडलायुक्त श्री राजेश प्रकाश, डीआईजी श्रीमती पूनम, जिलाधिकारी श्री शैलेष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री अभिनव त्यागी, मुख्य विकास अधिकारी श्री बाल गोविंद शुक्ल तथा अपर जिलाधिकारी श्रीमती शुभांगी शुक्ला सहित विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. महेश कुमार, परीक्षा नियंत्रक श्री केशलाल, सहायक कुलसचिव श्री शिरीष कुमार सिंह, विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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