ब्यूरो रिपोर्ट मनीष द्विवेदी
कौशाम्बी
कौशांबी ग्राम पंचायत अमिरसा में पंडित स्वतंत्र कुमार शुक्ला एवं श्रीमती गीता देवी शुक्ला के यहां चल रही श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के दूसरे दिन बुधवार को कथावाचक जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज के मुखारविंद से भीष्म कथा के साथ-साथ परीक्षित जन्म, सती चरित्र एवं ध्रुव चरित्र का विस्तृत वर्णन किया गया।
कथा के प्रारंभ में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ व्यास पीठ का पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कहा कि भीष्म पितामह दृढ़ प्रतिज्ञा, त्याग और धर्म के प्रतीक थे। उन्होंने पिता महाराज शांतनु के सुख के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और राजसिंहासन का त्याग कर दिया। इसी भीषण प्रतिज्ञा के कारण उनका नाम देवव्रत से भीष्म पड़ा।
कथावाचक ने बताया कि महाभारत युद्ध में बाणों की शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने 58 दिनों तक सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की और उसी दौरान युधिष्ठिर को राजधर्म व विष्णु सहस्रनाम का उपदेश दिया।
इसके बाद महाराज श्री ने परीक्षित जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित को अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माया से बचाया। परीक्षित के जन्म पर ही ऋषियों ने भविष्यवाणी की थी कि ये बालक भगवान का परम भक्त होगा और इसी के कारण भागवत कथा का श्रवण कलियुग में होगा।
सके बाद सती चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर योगाग्नि में अपना शरीर त्याग दिया। सती का त्याग पतिव्रता धर्म और नारी शक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।
हीं ध्रुव चरित्र सुनाते हुए महाराज श्री ने कहा कि मात्र 5 वर्ष की आयु में सौतेली मां के तानों से आहत होकर बालक ध्रुव ने घोर तपस्या की और भगवान विष्णु के दर्शन कर अटल ध्रुव लोक का पद प्राप्त किया। ध्रुव की कथा हमें सिखाती है कि दृढ़ संकल्प और भक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन पर श्रद्धालु झूम उठे। पंडाल में मौजूद सैकड़ों महिला-पुरुष भाव-विभोर हो गए।
इस अवसर पर मुख्य यजमान पंडित स्वतंत्र कुमार शुक्ला एवं श्रीमती गीता देवी शुक्ला के साथ ही दीपचंद शुक्ला, अमित कुमार, अमित कुमार शुक्ला, लाल साहब मिश्रा, शिव प्रताप मिश्रा सहित ग्राम के गणमान्य लोग व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा के समापन पर महाआरती हुई और प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजकों ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक होता है।