मऊ
रिपोर्ट सिंटू विश्वकर्मा
मणिकर्णिका घाट के संरचनात्मक हिस्सों को अचानक गिराया गया है, वह केवल एक निर्माण नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा पर सीधा हमला है। यह कृत्य इतिहास, परंपरा और महापुरुषों की विरासत को मिटाने की सुनियोजित साज़िश को उजागर करता है।
इस ऐतिहासिक अन्याय के विरोध में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर ज़िला कांग्रेस कमेटी मऊ के अध्यक्ष राजमंगल यादव के नेतृत्व में आज जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदया को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में घाट के ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक, दोषियों पर कार्रवाई और विरासत की पुनर्स्थापना की स्पष्ट मांग की गई।
ज्ञापन सौंपते हुए ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष राजमंगल यादव ने तीखे शब्दों में कहा कि,
“जिस तरह भाजपा सरकार देश के इतिहास और महापुरुषों की निशानियों को एक-एक कर मिटाने की कोशिश कर रही है, वह अक्षम्य और निंदनीय है। मणिकर्णिका घाट जैसे पवित्र स्थल से छेड़छाड़ करोड़ों भारतीयों की आस्था पर चोट है। कांग्रेस इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी।”
कांग्रेस की प्रमुख माँगें:
मणिकर्णिका घाट पर हुए ध्वस्तीकरण की न्यायिक जाँच कराई जाए।
विरासत संरचनाओं को नुकसान पहुँचाने वाले अधिकारियों/एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई हो।
ऐतिहासिक स्वरूप को तत्काल बहाल किया जाए।
भविष्य में किसी भी धरोहर पर कार्रवाई से पहले विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों की सहमति अनिवार्य की जाए।
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं और ऐतिहासिक विरासत के साथ यह खिलवाड़ नहीं रोका, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। यह लड़ाई केवल एक घाट की नहीं, भारत की पहचान, इतिहास और सम्मान की है—और कांग्रेस इसे आख़िरी दम तक। हरिश्चंद्र यादव, उदय प्रताब राय, शिवाजी कन्नौजिया, रामकेश सिंह पटेल, मनोज गिहार, फ़हद क़ादिर, अमृतमल, हफीजुर्रहमान, महेंद्र सोनकर, आफ़ताब सिद्दीकी, मो. अनस, मंशा राजभर, सुरेश राजभर, कन्हैया गौंड, शाहिद फारूकी, उमर फारूक, परशुराम यादव, राजेश यादव, उपस्थित रहे।
मऊ से सिन्टू विश्वकर्मा की रिपोर्ट
