भ्रष्टाचार में डूबा सरसवा ब्लॉक विकास खण्ड की मनरेगा योजना के  ग्राम पंचायत दानपुर में 71 श्रमिकों के नाम पर 10 मास्टर रोल, एक ही समूह की फोटो से भरी जा रही हाजिरी

रिपोर्ट कृष्णजीत यादव

कौशाम्बी

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों को पारदर्शी और विधिसम्मत रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन विकास खण्ड सरसवां की ग्राम पंचायत दानपुर से सामने आए अभिलेख इस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेज संकेत देते हैं कि जिम्मेदार स्तरों पर अपेक्षित निगरानी और उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं किया गया। अभिलेखों के अनुसार रामप्रकाश के खेत से घनश्याम के खेत तक नाली सफाई तथा बनियानी तालाब की खुदाई—इन दो अलग-अलग कार्यों के लिए कुल 71 श्रमिकों के नाम से 10 मास्टर रोल जारी किए गए। वहीं संलग्न फोटो साक्ष्यों के सूक्ष्म परीक्षण में दोनों कार्यों में एक ही श्रमिक समूह की तस्वीरों की पुनरावृत्ति दिखाई दे रही है, जो वास्तविक उपस्थिति और अभिलेखीय प्रविष्टियों के बीच गंभीर असंगति का संकेत देती है। यह स्थिति मनरेगा नियमावली में निर्धारित पारदर्शिता, पृथक मास्टर रोल संधारण और वास्तविक श्रमिक सत्यापन के प्रावधानों के विपरीत प्रतीत होती है। ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेखों की शुचिता सुनिश्चित करना सचिव, ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की जिम्मेदारी होती है, जबकि विकास खण्ड स्तर पर कार्यों की निगरानी, सत्यापन और वित्तीय पारदर्शिता का दायित्व खण्ड विकास अधिकारी और अन्य जिम्मेदारों पर निर्धारित है। ऐसे में फोटो पुनरावृत्ति और श्रमिक संख्या में अंतर निगरानी तंत्र की शिथिलता—यहाँ तक कि संभावित प्रशासनिक अनियमितता—की ओर संकेत करता है। जनकल्याणकारी योजना में इस प्रकार की विसंगति को साधारण त्रुटि नहीं माना जा सकता, क्योंकि मजदूरी भुगतान सार्वजनिक धन से होता है। अतः आवश्यक है कि सक्षम प्राधिकारी स्तर से समग्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए तथा अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित सभी जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *