जीएसटी की आड़ में तंबाकू माफियाओं का सिंडिकेट सक्रिय एमआरपी को ताक पर रख जनता की जेब पर डाका
रिपोर्ट धनराज कुमार सिराथू
कौशाम्बी
जनपद में इन दिनों तंबाकू उत्पादों की कालाबाजारी का एक ऐसा संगठित खेल चल रहा है जिसने न केवल बाजार के नियमों बल्कि कानूनी व्यवस्था को भी खुली चुनौती दे दी है आगामी दिनों में जीएसटी दरों में संभावित बढ़ोतरी की सुगबुगाहट को ढाल बनाकर जिले के मंझनपुर सिराथू सैनी भरवारी और अझुवा जैसे प्रमुख केंद्रों के रसूखदार व्यापारियों ने गुटखा सिगरेट और तंबाकू का एक अघोषित साम्राज्य स्थापित कर लिया है विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इन व्यापारिक केंद्रों के बड़े स्टॉकिस्टों ने अपनी अधिकृत दुकानों के बजाय निजी आवासों और सुनसान इलाकों में बने अवैध गोदामों में करोड़ों रुपये का माल डंप कर दिया है मंझनपुर से लेकर अझुवा तक फैले इस सिंडिकेट ने बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा कर दी है
जिससे आम उपभोक्ताओं को आर्थिक चोट पहुंच रही है हैरानी की बात यह है कि उत्पादन कंपनियों ने फिलहाल प्रिंट रेट में कोई वृद्धि नहीं की है इसके बावजूद भरवारी और सैनी के थोक विक्रेता फुटकर दुकानदारों से 10 से 20 प्रतिशत अधिक दाम वसूल रहे हैं बिना पक्के बिल के हो रहे इस अवैध कारोबार के कारण छोटा दुकानदार मजबूरन ग्राहकों से मनमाने दाम ले रहा है जिससे सीधे तौर पर आम जनता का शोषण किया जा रहा है खोजी पड़ताल में सामने आया है कि सिराथू और भरवारी क्षेत्र में कई ऐसे गोदाम हैं जिनका कोई सरकारी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है रात के सन्नाटे में इन ठिकानों पर ट्रकों से माल उतारा जाता है और फिर उसे ग्रामीण अंचलों में ऊंचे दामों पर खपाया जाता है
यह पूरा खेल सिर्फ अवैध मुनाफाखोरी के लिए रचा गया है जिससे सरकार को मिलने वाले राजस्व को भी भारी चपत लग रही है स्थानीय नागरिकों और छोटे व्यापारियों में इस सरेआम लूट को लेकर भारी आक्रोश है जनता ने जिलाधिकारी और जीएसटी विभाग से मांग की है कि संदिग्ध गोदामों की तत्काल पहचान कर सघन छापेमारी की जाए साथ ही स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक माल का भौतिक सत्यापन कर जमाखोरी करने वाले रसूखदारों पर कठोरतम धाराओं में कार्रवाई की जाए जनपद के तेज तर्रार जिलाधिकारी डॉ.अमित पाल शर्मा की सख्त कार्यशैली को देखते हुए आम जनता को यह पूर्ण विश्वास है कि वे इन सफेदपोश जमाखोरों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन सिंडिकेट संचालकों पर नकेल कसने के लिए कितनी शीघ्रता से प्रभावी कदम उठाता है ताकि कानून का इकबाल कायम रहे
