उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के युवा कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विमल निषाद, डॉ. वैभव श्रीवास्तव और डॉ. ऋषिका पटेल की टीम ने सीमित संसाधनों में भी तीन गंभीर हृदय रोगियों को सफलतापूर्वक नया जीवन प्रदान किया है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के युवा कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विमल निषाद, डॉ. वैभव श्रीवास्तव और डॉ. ऋषिका पटेल की टीम ने सीमित संसाधनों में भी तीन गंभीर हृदय रोगियों को सफलतापूर्वक नया जीवन प्रदान किया है।

ये सभी प्रक्रियाएं बिना किसी ओपन हार्ट सर्जरी या चीड़-फाड़ के की गईं, जो प्रयागराज में चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.के. पाण्डेय ने पुष्टि की है कि तीनों मरीज अब स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

 

पहला मामला प्रयागराज के कोरांव के 58 वर्षीय मरीज का है। यह मरीज ब्लैडर आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन से पीड़ित था, लेकिन हृदय में 32 मिमी का बड़ा छेद एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट होने के कारण कोई सर्जन ओपरेशन के लिए तैयार नहीं था। मरीज हाई कार्डियक रिस्क में था और पिछले एक साल से बहुत परेशान था।

 

डॉक्टर्स की टीम ने कैथ लैब में 40 मिमी के डिवाइस से हृदय का छेद सफलतापूर्वक बंद किया। अब एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट क्लोजर के बाद 3 महीने में ब्लैडर सर्जरी सुरक्षित रूप से हो सकेगी।

 

दूसरा मामला प्रयागराज के जारी गांव के 25 वर्षीय युवक का है। जहां मेला क्षेत्र में कल्पवास के दौरान युवक की तबीयत बिगड़ी और उसे हार्ट फेल्योर की स्थिति में अस्पताल लाया गया। पिछले तीन साल से सांस फूलने और धड़कन की समस्या थी, तथा टीबी की दवाएं ले रहा था। जांच में टीबी नहीं, बल्कि गंभीर माइट्रल स्टेनोसिस यानि हृदय का बायां वाल्व सिकुड़ना पाया गया।

 

टीम ने निःशुल्क बैलून माइट्रल वाल्वोटॉमी प्रक्रिया की, जिसके बाद युवक की हालत में तेजी से सुधार हुआ।

 

वहीं तीसरा मामला, फूलपुर का है। जहां 52 वर्षीय महिला के हृदय में 31 मिमी का छेद था, जिससे दाहिना हृदय फेल हो चुका था और लीवर में कंजेशन से गंभीर समस्याएं थीं। डॉक्टर्स ने दाहिनी जांघ की नस के माध्यम से 38 मिमी के डिवाइस से छेद बंद किया। मरीज अब स्वस्थ है और 3-6 महीनों में राइट हार्ट फेल्योर व लीवर की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

 

ये सभी केस जटिल थे लेकिन युवा डॉक्टर्स की टीम ने परक्यूटेनियस इंटरवेंशन तकनीक से सफलता हासिल की, जिससे मरीजों को बड़ा ऑपरेशन और जोखिम से बचाया गया।

रिपोर्ट विमल शर्मा

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