जूनियर इंजीनियर (JE) से की, तो उन्होंने न सिर्फ बिल को सही ठहराने की कोशिश की, बल्कि उनसे “2,000 रुपये की रसीद कराने” का अनुरोध किया। JE ने धमकी दी कि अगर यह रकम नहीं दी गई, तो विद्युत विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

रिपोर्ट अवध बिहारी

कौशाम्बी जिले के ग्रामीण इलाके काजू पानी टंकी चरवा कौशांबी के रहने वाले एक गरीब किसान श्री चंद्र शेखर (पिता: शारदा प्रसाद) आज बिजली विभाग के भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का शिकार होने का आरोप लगा रहे हैं। चंद्र शेखर ने लगभग 14 महीने पहले अपने घर पर एक नया बिजली कनेक्शन मीटर लगवाया था। इस अवधि में उनके घर में लगभग 250-260 यूनिट बिजली की खपत हुई, लेकिन विभाग ने उन्हें 10,000 रुपये का बिल थमा दिया

चंद्र शेखर ने बताया कि जब उन्होंने इस असंगत बिल की शिकायत जूनियर इंजीनियर (JE) से की, तो उन्होंने न सिर्फ बिल को सही ठहराने की कोशिश की, बल्कि उनसे “2,000 रुपये की रसीद कराने” का अनुरोध किया। JE ने धमकी दी कि अगर यह रकम नहीं दी गई, तो विद्युत विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। चंद्र शेखर का कहना है, “मैं एक गरीब किसान हूं। इतना पैसा कहां से लाऊं? ये लोग मुझसे रिश्वत मांग रहे हैं।”

उपभोक्ता ने उठाए सवाल:
चंद्र शेखर ने पत्रकारों से पूछा, “क्या सिर्फ 260 यूनिट के बदले 10,000 रुपये का बिल बनता है? क्या विद्युत विभाग का काम अब गरीबों से रिश्वत वसूलना रह गया है? क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की ‘भ्रष्टाचार मुक्त UP’ की घोषणा सिर्फ कागजों तक सीमित है?”

क्या है नियम?
बिजली नियामक आयोग (UPERC) के मानकों के अनुसार, एक सामान्य घरेलू कनेक्शन पर लगभग 250-260 यूनिट के बिजली बिल की रकम 1500 से 2000 रुपये के बीच ही आनी चाहिए, न कि 10,000 रुपये। ऐसे में यह बिल न सिर्फ गलत प्रतीत होता है, बल्कि इसमें धांधली की आशंका जताई जा रही है।

शिकायत दर्ज, लेकिन नहीं हुई कोई कार्रवाई:
पीड़ित चंद्र शेखर ने इस मामले की शिकायत स्थानीय एक्सीक्यूटिव इंजीनियर और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

जनता से अपील:
चंद्र शेखर ने मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ऊर्जा मंत्री उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी कौशाम्बी से अपील की है कि उनकी समस्या पर तुरंत ध्यान दिया जाए और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा, “मैं तो एक गरीब आदमी हूं, लेकिन कल को यही धांधली किसी और के साथ हो सकती है।”
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश बिजली विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि एक गरीब किसान की आवाज दबा दी जाती है? प्रशासन और विद्युत निगम के शीर्ष अधिकारियों की निगाहें अब इस मामले पर हैं।